इंटरनेट कैसे इस्तेमाल करे?

देश के किसी भी सामान्य नागरिक तक कोई भी गलत या अधूरी जानकारी पहुंचना बेहद घातक हैं. खास करके अगर वह जानकारी देश की राजनीती से जुडी हुई हो तब.

कुछ दो साल पहले भारत में एक अभूतपूर्व प्रसंग आया जब जियो सिम द्वारा सामान्य से सामान्य व्यक्ति के पास इंटरनेट सुविधा उपलब्ध हो गई. इससे भारत देश में एक क्रांति फेल गई. हर कोई मानो जैसे बरसो से इंटरनेट इस्तेमाल करने का आदि था कुछ वैसी स्थिति थी यह. (भारत में इंटरनेट १९९३ में ही आ गया था जो श्रीनिवासन वेंकटकृष्णन ने लाया था.)

भारत देश टेक्नोलॉजी में दूसरे देशो से थोड़ा पीछे रहा हैं और यहीं प्रमुख कारण भी कहा जा सकता हैं की अंग्रेज़ो ने हम पर इतने साल हुकूमत की. सोचो अगर भारत की संस्कृति और टेक्नोलॉजी एक समक्ष विक्सित होती तोह बेशक आज हमारी गिनती महासत्ता वाले देशो में होती. शायद भारतीय, टेक्नोलॉजी से ज़्यादा अपनी मेहनत पर विश्वास करते थे इसलिए उन्होंने अपने काम को सरल बनाने के तरीको पर कभी ध्यान ही नहीं दिया. 

मुद्दे पर आते हुए अब हमारे पास इंटरनेट तोह आ गया है लेकिन क्या हमे इसे इस्तेमाल करना आता हैं यह सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण प्रश्न हैं. 

हम लोग इंटरनेट का ८० प्रतिशत इस्तेमाल सोशियल मीडिया और मनोरंजन के लिए उपयोग करते हैं. फेसबुक, व्हॉट्सएप, यूट्यूब यह हमारे मुख्य एपस हैं. इन् एपस पर हम अपनी निजी ज़िन्दगी के कुछ पल अपने दोस्तों और करीबी रिश्तेदारों के साथ शेयर करते है. इसी बीच हम कई सारी खबरों से भी रूबरू होते हैं. और इंटरनेट के होते हुए अशिक्षित लोग भी यूट्यूब पर वीडियो के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

मतलब अब हमारी आवाम के लिए जानकारी पाने को बेहद कम अवरोध रह गए हैं या शायद न के बराबर. कहाँ एक ज़माना था जब हमे कोई इतिहास से जुडी हुई जानकारी के लिए किताबे खरीदनी पड़ती थी. या फिर अखबार होते थे. उफ़ कितने मुश्किल के दिन थे वह भी. आज हमे कोई भी प्रश्न हो तोह हम तुरंत गूगल की मदद से उस पर ढेड़ सारी सुचना का भण्डार खुरेद सकते हैं. और जो इंटरनेट कहता हैं हम उसी हिसाब से सब मान लेते हैं. जैसे की हमने मान लिया ऊपर मैंने जो कहा की इंटरनेट भारत में १९९३ से आया जो श्रीनिवासन वेंकटकृष्णन ने लाया लेकिन वह गलत था. अगर आप जानते थे यह गलत हैं तोह आप जानकार इंसान हैं. लेकिन अगर आप नहीं जानते तोह आप यह बात शायद मान लेते और अपने किसी मित्र या परिवारजन से भी शेयर करते. और भले कुछ लोगो तक ही लेकिन गलत अफवाह ज़रूर फैलती. 

अब बेशक हर एक जानकारी को परखना बेहद मुश्किल हैं. हम कुछ भी पढ़ते या सुनते वक़्त अपना सारा ध्यान उसे समझने में लगा देते हैं. हम उनकी बताई गयी जानकारी का या आंकड़ों की जांच नहीं करते. यह बेहद निराशाजनक बात हैं लेकिन सच से ऊपर कुछ नहीं. तो में ज़्यादा नहीं कहूंगा लेकिन किसी भी फेसबुक पेज की बातें या यूट्यूब पर सुनी हुई कहानी/खबर को परखे उसके बाद ही किसीसे शेयर करे. क्यूंकि एक गलत खबर १०० सही खबरों के आड़े आ सकती हैं. 

और हाँ इंटरनेट कब आया और कौन लाया यह आप खुद कम्मेंट बॉक्स में बताये. और एक और जानकारी मैंने गलत दी है उसे भी बताये.

Published by

Jaideep Lalchandani

Jaideep Lalchandani has studied Journalism from Mumbai University. He loves to read and research about work that matters for the masses and not only the classes. Empowering U is a platform where he brings his creative freedom to write and criticise the status quo with precise information. He also shares his views on the current affairs on any random topics. He feels India needs to share the correct information amidst the growing threat of misinformation being spread.

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